GST बिल कैसे बनाएं: दुकान के बिल पर क्या ज़रूरी है
अगर आपकी दुकान GST में रजिस्टर्ड है, तो आपका हर बिल एक कानूनी काग़ज़ है। इस गाइड में आसान शब्दों में बताया है कि GST टैक्स इनवॉइस पर क्या-क्या होना चाहिए, कब बिल ऑफ़ सप्लाई देना है, और एक सैंपल बिल भी है।
यह आम जानकारी है, टैक्स सलाह नहीं। GST के नियम बदलते रहते हैं; अपने मामले के लिए CA से ज़रूर पूछें। स्रोत: CGST नियम 46 और 49, cbic-gst.gov.in।
1. टैक्स इनवॉइस या बिल ऑफ़ सप्लाई?
- टैक्स इनवॉइस — आप GST में रजिस्टर्ड रेगुलर दुकान हैं और टैक्स वाला सामान बेचते हैं। बिल पर GST दिखता है।
- बिल ऑफ़ सप्लाई — आप कंपोज़िशन स्कीम में हैं, या सिर्फ़ टैक्स-फ़्री सामान बेचते हैं। बिल पर GST नहीं दिखता। कंपोज़िशन वाली दुकान को बिल पर “composition taxable person, not eligible to collect tax on supplies” भी लिखना होता है।
- रजिस्टर्ड नहीं — सादा बिल या कैश मेमो दें; GST न लें, न दिखाएँ।
2. GST टैक्स इनवॉइस पर ज़रूरी बातें (नियम 46)
| क्या | क्या लिखें |
|---|---|
| आपकी जानकारी | दुकान का नाम, पता और GSTIN |
| बिल नंबर | लगातार, पूरे वित्त वर्ष में अलग, 16 अक्षर तक (अक्षर, अंक, “-” या “/”) |
| तारीख़ | बिल बनने की तारीख़ |
| ग्राहक की जानकारी | रजिस्टर्ड ग्राहक: नाम, पता और GSTIN। बिना रजिस्ट्रेशन वाला ग्राहक: टैक्सेबल वैल्यू ₹50,000 से ज़्यादा हो (या ग्राहक माँगे) तो नाम और पता |
| सप्लाई की जगह | राज्य का नाम (और कोड) — दूसरे राज्य में बिक्री पर ज़रूरी |
| सामान की लाइनें | नाम/विवरण, HSN कोड, मात्रा और यूनिट |
| रकम | कुल रकम, छूट (अगर है) और टैक्सेबल वैल्यू |
| टैक्स | CGST + SGST/UTGST (उसी राज्य में) या IGST (दूसरे राज्य) का रेट और रकम, और सेस अगर है |
| रिवर्स चार्ज | टैक्स रिवर्स चार्ज पर है या नहीं (दुकानों के लिए आम तौर पर “नहीं”) |
| हस्ताक्षर | दुकानदार या अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर |
3. दुकान का सैंपल GST बिल
रेगुलर GST दुकान की उसी राज्य में बिक्री, दाम GST से पहले। आपके प्रिंटर का लेआउट अलग हो सकता है — ज़रूरी है कि सारी बातें बिल पर हों। (छपा हुआ बिल आम तौर पर English में होता है।)
Brozap ऐसा बिल 58 mm और 80 mm थर्मल प्रिंटर पर, हर रेट के टैक्स सार के साथ छापता है। देखें: Brozap में GST बिलिंग।
4. HSN कोड के कितने अंक?
- पिछले साल टर्नओवर ₹5 करोड़ तक: B2B बिल पर कम से कम 4 अंक (B2C बिल पर ज़रूरी नहीं)।
- टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा: हर बिल पर कम से कम 6 अंक।
- सलाह: हर प्रोडक्ट के साथ पूरा 8 अंक का कोड रखें, ताकि हर रिपोर्ट में काम आए।
5. छोटे बिल, B2C और ई-इनवॉइस
- ₹200 से कम के बिल, जब बिना रजिस्ट्रेशन वाला ग्राहक बिल न माँगे: कानून दिन के अंत में ऐसी बिक्री का एक जोड़ बिल बनाने देता है। फिर भी कई दुकानें हर बिल छापती हैं — इससे स्टॉक और कैश का हिसाब साफ़ रहता है।
- ई-इनवॉइस (IRN) उन बिज़नेस के B2B बिल पर है जिनका टर्नओवर GST कानून की सीमा से ज़्यादा है — लिखते समय ₹5 करोड़। आम ग्राहकों (B2C) के बिल पर IRN नहीं चाहिए।
- ई-वे बिल ₹50,000 से ज़्यादा के सामान की ढुलाई के लिए है; यह बिल से अलग चीज़ है।
6. आम सवाल
क्या मोबाइल से GST बिल बना सकते हैं?
हाँ। Brozap जैसा GST बिल बनाने वाला ऐप दुकान की जानकारी, बिल नंबर, HSN और टैक्स अपने आप भरता है, और Bluetooth थर्मल प्रिंटर पर छापता है या WhatsApp पर भेजता है।
क्या हाथ से लिखा GST बिल मान्य है?
हाँ, अगर उसमें सारी ज़रूरी बातें हैं और बिल नंबर लगातार हैं। ऐप से छपे बिल में गलती और छूटी जानकारी की संभावना बहुत कम होती है।
बिल पर CGST-SGST दिखाएँ या IGST?
ग्राहक उसी राज्य का: CGST + SGST (दोनों GST रेट का आधा-आधा)। ग्राहक दूसरे राज्य का: पूरे रेट पर IGST।
क्या कंपोज़िशन वाली दुकान बिल पर GST दिखाती है?
नहीं। कंपोज़िशन वाली दुकान बिना टैक्स का बिल ऑफ़ सप्लाई देती है, जिस पर “composition taxable person, not eligible to collect tax on supplies” लिखा होता है।